झारसुगुड़ा. जैसे-जैसे भारत ‘स्वच्छ भारत’ के विज़न की ओर बढ़ रहा है, स्वच्छता को सामूहिक ज़िम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। यह सिर्फ़ दिखावे की बात नहीं है, बल्कि यह रोज़मर्रा के अनुशासन और उस ‘ओनरशिप’ (ज़िम्मेदारी की भावना) को दिखाता है जो वर्कप्लेस, सार्वजनिक जगहों और समुदायों को बेहतर बनाते हैं। बड़े औद्योगिक सिस्टम में, ये सिद्धांत तय करते हैं कि संसाधनों का मैनेजमेंट कैसे हो, वर्कप्लेस का रखरखाव कैसे हो और लोग अपने आस-पास की जगहों की ज़िम्मेदारी कैसे लें। भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी, वेदांता एल्युमीनियम में, स्वच्छता कंपनी की कार्य-संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसके लिए ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जो प्लांट, टाउनशिप और आस-पास के समुदायों में सामूहिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देते हैं। साफ़-सुथरा, सुरक्षित और बेहतर माहौल बनाकर, कंपनी उन बड़े प्रयासों में योगदान दे रही है जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट और ‘विकसित भारत’ की ओर देश की यात्रा को सपोर्ट करते हैं।
‘ओनरशिप’ की यह संस्कृति वेदांता एल्युमीनियम के कामकाज में साफ़ दिखती है। इसका झारसुगुड़ा प्लांट एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे स्वच्छता को रोज़मर्रा के कामकाज में शामिल किया गया है। 5S सिद्धांतों (जो व्यवस्थित, कुशल और अनुशासित वर्कप्लेस को बढ़ावा देते हैं) का पालन करते हुए, यहाँ नियमित समीक्षा और लगातार सुधार की पहल के ज़रिए वर्कप्लेस मैनेजमेंट का एक व्यवस्थित तरीका अपनाया जाता है। टीमें व्यवस्थित रूप से फालतू सामान की पहचान करती हैं और उसे हटाती हैं, जिससे काम का माहौल ज़्यादा व्यवस्थित बनता है और जगह का बेहतर इस्तेमाल होता है। इन प्रयासों से 400 वर्ग मीटर से ज़्यादा वर्कप्लेस की जगह वापस मिली है और ऑपरेटर की रोज़ाना की आवाजाही तीन किलोमीटर से ज़्यादा कम हुई है, जिससे एर्गोनॉमिक्स और ऑपरेशनल क्षमता में सुधार हुआ है। इन प्रयासों की सफलता को देखते हुए, वेदांता एल्युमीनियम के स्मेल्टर और पावर प्लांट को ‘क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ़ इंडिया’ ने ‘यूनियन ऑफ़ जैपनीज़ साइंटिस्ट्स एंड इंजीनियर्स’ (JUSE) के साथ मिलकर 5S सर्टिफ़िकेशन दिया है। वहीं, झारसुगुड़ा में कंपनी की रिहायशी टाउनशिप, ‘वेदांता मीडोज़’ को हाल ही में इंडस्ट्रियल टाउनशिप कैटेगरी में ‘एम.के. राउट पॉल्यूशन कंट्रोल एप्रिसिएशन अवॉर्ड 2026’ मिला है।
इन उपलब्धियों के मूल में व्यक्तिगत ‘ओनरशिप’ की संस्कृति है। ‘माई एरिया एंड माई मशीन’ पहल के ज़रिए, कर्मचारी और बिज़नेस पार्टनर खास वर्कप्लेस और उपकरणों की ज़िम्मेदारी लेते हैं, जिससे जवाबदेही बढ़ती है और उन्हें अपने आस-पास की जगह पर गर्व महसूस होता है। ‘उत्कृष्ट’ जैसे रिकग्निशन प्रोग्राम इस कल्चर को और मज़बूत करते हैं। ये प्रोग्राम उन टीमों को सम्मानित करते हैं जो काम की जगह पर बेहतरीन ऑर्गनाइज़ेशन और सफ़ाई के स्टैंडर्ड दिखाती हैं, जिससे ये आदतें रोज़मर्रा के कामकाज का हिस्सा बन जाती हैं।
हालांकि काम की जगह पर ऑर्गनाइज़ेशन की शुरुआत व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी से होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर सफ़ाई बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार रिसोर्स मैनेजमेंट की ज़रूरत होती है। BALCO में, यह सोच व्यवस्थित 5S प्रैक्टिस, मशीनी सफ़ाई सिस्टम और ऑपरेशनल एरिया में कचरे को व्यवस्थित रूप से अलग करने की प्रक्रिया में दिखती है। ऑपरेशन का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से संपत्ति) अप्रोच मटीरियल की रिकवरी, रीसाइक्लिंग और ज़िम्मेदार मैनेजमेंट पर फ़ोकस करता है, जिससे पर्यावरण पर असर कम करते हुए रिसोर्स की क्षमता बेहतर होती है। तय कलेक्शन सिस्टम और व्यवस्थित स्क्रैप मैनेजमेंट प्रैक्टिस के ज़रिए, सफ़ाई रिसोर्स का ज़्यादा ज़िम्मेदारी और कुशलता से इस्तेमाल करने के बड़े लक्ष्य से गहराई से जुड़ जाती है। ज़िम्मेदार खपत पर ऐसा ही ज़ोर वेदांता एल्युमीनियम के लांजीगढ़ ऑपरेशन में भी दिखता है, जहाँ कचरा कम करने की कोशिशों के साथ-साथ मज़बूत पर्यावरण प्रैक्टिस भी अपनाई जाती हैं। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री के ‘प्लास्टिक यूज़ प्रोटोकॉल’ के तहत साइट का ‘सिंगल-यूज़ प्लास्टिक-फ़्री ऑपरेशन’ के तौर पर सर्टिफ़िकेशन, रिसोर्स के प्रति जागरूक वर्कप्लेस कल्चर को बढ़ावा देने की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है, जहाँ सफ़ाई और सस्टेनेबिलिटी साथ-साथ चलते हैं।
प्लांट की सीमाओं से आगे बढ़कर, यही सिद्धांत समुदाय की भलाई पर भी लागू होते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में स्वच्छता की भूमिका को समझते हुए, वेदांता एल्युमीनियम ने साफ़-सुथरे और स्वस्थ समुदाय बनाने के लिए कई पहल की हैं। ‘प्रोजेक्ट निर्मल’ के तहत, कंपनी की कुरालोई, जामखानी और घोगरपल्ली कोयला खदानों ने FY25 में 27 जगहों पर 50 बायो-टॉयलेट लगाए, जिनसे लगभग 4,700 से ज़्यादा समुदाय के लोगों को फ़ायदा हुआ। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लगाए गए इन सिस्टम के साथ-साथ जागरूकता अभियान, पीने के साफ़ पानी की सुविधा और समुदाय के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान भी चलाए जाते हैं, जो लोगों को साझा जगहों की देखभाल और ज़िम्मेदारी लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
सिजीमाली में भी, कालाहांडी और रायगडा ज़िलों के 16 गांवों में ‘स्वास्थ्य और स्वच्छता परियोजना’ के ज़रिए इसी तरह की पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। साफ़-सफ़ाई के प्रति जागरूकता, स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं और कचरा प्रबंधन पर केंद्रित इन प्रयासों से FY27 में 8,800 से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा। ये सभी प्रयास दिखाते हैं कि कैसे स्वच्छता केवल समय-समय पर की जाने वाली गतिविधि से बदलकर ज़िम्मेदारी की एक साझा संस्कृति बन सकती है, जिससे काम करने की जगहें साफ़-सुथरी और समुदाय स्वस्थ बनते हैं, और साथ ही ‘स्वच्छ भारत’ और ‘विकसित भारत’ के बड़े विज़न को भी बढ़ावा मिलता है।







