Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृ पक्ष में पितरों को याद करने और उनका पूजन करने से व्यक्ति पर पूर्वजों की विशेष कृपा बरसती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में पितृ धरती लोक पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। बता दें कि जिस व्यक्ति पर पितरों की असीम कृपा रहती है उसके घर में सदैव सुख-समृद्धि का वास रहता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म में इस समय को बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह से पितरों को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए दान, तर्पण, पिंडदान और पुण्य कार्यों से पितरों को शांति मिलती हैं। यही वजह है कि, पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करते हैं। इस दौरान श्राद्धकर्म में लोग ब्राह्मणों को भोजन, दान-पुण्य और पितरों के तर्पण करते हैं। परंतु सवाल यह है कि, इस बार पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा है और पहला श्राद्ध किस दिन किया जाएगा। आइए इसके बारे में जानते हैं।
कब है पहला श्राद्ध?
स्नान-दान मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
पितृपक्ष 2026 कैलेंडर
| दिनांक | वार | तिथि | श्राद्ध |
|---|---|---|---|
| 26 सितंबर | शनिवार | भाद्रपद पूर्णिमा | पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | रविवार | प्रतिपदा | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | सोमवार | द्वितीया | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | मंगलवार | तृतीया | तृतीया श्राद्ध |
| 30 सितंबर | बुधवार | चतुर्थी | चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध |
| 1 अक्टूबर | गुरुवार | षष्ठी | षष्ठी श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | शुक्रवार | सप्तमी | सप्तमी श्राद्ध |
| 3 अक्टूबर | शनिवार | अष्टमी | अष्टमी श्राद्ध |
| 4 अक्टूबर | रविवार | नवमी | नवमी श्राद्ध |
| 5 अक्टूबर | सोमवार | दशमी | दशमी श्राद्ध |
| 6 अक्टूबर | मंगलवार | एकादशी | एकादशी श्राद्ध |
| 7 अक्टूबर | बुधवार | द्वादशी | द्वादशी श्राद्ध |
| 8 अक्टूबर | गुरुवार | त्रयोदशी | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 9 अक्टूबर | शुक्रवार | चतुर्दशी | चतुर्दशी श्राद्ध |
| 10अक्टूबर | शनिवार | अमावस्या | सर्वपितृ श्राद्ध |
सर्व पितृ अमावस्या 2026
- अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 को रात 09:35 बजे शुरू होगी।
- इसका समापन अगले दिन 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:20 बजे होगा।
- 2026 में सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मान्य होगी।
पितृ स्तोत्रं पाठ
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥
मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥
प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥
तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥
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