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सावन के दूसरे सोमवार पर बन रहा प्रदोष व्रत का शुभ संयोग, शिवभक्त पाएंगे भोलेनाथ की डबल कृपा

सावन के दूसरे सोमवार (10 अगस्त 2026) पर सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस पावन दिन पर शिव भक्त महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना कर डबल कृपा प्राप्त कर सकते हैं।  बता दें कि जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। प्रदोष का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है।

इस दिन व्रत रखकर भोलेनाथ और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।  ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं और हर परेशानी से भी मुक्ति मिलती है।

सोम प्रदोष की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। सोम प्रदोष और सावन के दूसरे सोमवार के दिन पूजा के लिए  ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से सुबह 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से दोपहर 1 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।

सोम प्रदोष पूजा विधि : 

  • प्रदोष के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इस दिन सफेद, लाल, हरा या केसरिया रंग के कपड़े पहनें।
  • इसके बाद मंदिर या शिव जी के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • अब शिवलिंग का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और चीनी चढ़ाएं। पंचामृत से अभिषेक के बाद शिवलिंग पर फिर से साफ जल चढ़ाएं।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत और आंकड़े (मदार) के फूल अर्पित करें।
  • अंत में दीया जलाएं और शिव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करें। इसके बाद शिवजी की आरती करें।
  • शाम के समय यानी प्रदोष काल में फिर से शुद्ध होकर स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा आरंभ करें।
  • शिवलिंग के पास दीया जलाकर  प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  • पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप लगातार करते रहें।
  • अंत में शिव जी की आरती करें और खीर या फल का भोग लगाएं।

सोम प्रदोष व्रत और सावन सोमवार का महत्व

हिंदू धर्म में सोम प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से भगवान शिव की कृपा से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है और चंद्र दोष भी दूर होता है। वहीं सावन का पूरा महीना शिव जी की आराधना के लिए उत्तम माना गया है। लेकिन इस माह में आने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार के दिन उपवास रखने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती और महादेवी की खास कृपा भी बरसती है।

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