गोरखपुर। सिंघड़िया इलाके में अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की घटना के बाद आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा का नाम सामने आते ही पुलिस जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अंशिका बीते कई वर्षों से एक सुनियोजित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क चला रही थी, जिसमें बड़े अधिकारी, पुलिसकर्मी और राजनीतिक रसूख वाले लोग भी फंस चुके हैं।
मैसेंजर वीडियो कॉल बना हथियार :
पिता की मौत के बाद परिवार में टूटन :
भाई ने भी तोड़ लिया रिश्ता :
गांव में पहले से थी संदिग्ध छवि : ग्रामीणों के अनुसार, अंशिका, उसकी मां और एक बहन को लेकर गांव में लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि रुपये लेने के बाद किसी पर भी आरोप लगा देना उनके व्यवहार में शामिल हो चुका था। डर के कारण लोग उनके घर के आसपास जाने से भी कतराते थे।
घर से अक्सर गायब रहने का दावा : गांव की महिलाओं का कहना है कि मां और बेटियां अक्सर कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहती थीं और फिर वापस आती थीं। इसी कारण गांव में उनके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं फैलती रहीं और विश्वास पूरी तरह टूट चुका था।
पढ़ाई भी सीमित, लेकिन नेटवर्क बड़ा : ग्रामीणों के मुताबिक, अंशिका आठवीं तक ही पढ़ पाई, जबकि उसकी मंझली बहन किसी तरह दसवीं तक पढ़ी है। लेकिन पढ़ाई भले ही सीमित रही, उसका नेटवर्क काफी बड़ा और प्रभावशाली बताया जा रहा है।
गैंगस्टर एक्ट की तैयारी : गोरखपुर पुलिस अंशिका और उसके छह साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी कर रही है। मामला थार गाड़ी चोरी और फर्जी नंबर प्लेट लगाने से जुड़ा है। पुलिस जांच में सामने आया कि गाड़ी पर चार अलग-अलग राज्यों की फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थीं।
महंगे शौक बने गिरफ्तारी की वजह : पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अंशिका की लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे शौक उसकी गिरफ्तारी की कहानी के अहम सुराग बने। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद वह अंडरग्राउंड हो गई थी, लेकिन अब उसके पूरे नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं।







