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युवी का खुलासा : डॉक्टर ने कहा था मेरे पास तीन से छह महीने बचे हैं… संन्यास का कारण भी बताया

नई दिल्ली।  भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने खुलासा करते हुए बताया है कि जब उन्हें कैंसर के बारे में पता चला तो डॉक्टर ने उनसे कहा था कि उनके पास तीन से छह महीने बचे हैं। युवराज ने 2011 वनडे विश्व कप में भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था। विश्व कप के बाद युवराज का कैंसर का इलाज हुआ था और उन्होंने पूरी तरह ठीक होने के बाद मैदान पर वापसी की थी।

युवराज को एक साल से महसूस हो रहा था बदलाव :  युवराज ने टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ बातचीत में कहा, मुझे अपने शरीर में एक साल से बदलाव नजर आ रहा था। मुझे लगातार फ्रैक्चर हो रहा था और खाना भी नहीं पच रहा था क्योंकि ट्यूमर था। मुझे उस वक्त तक नहीं पता था कि मेरे शरीर में ट्यूमर है। मैंने बस क्रिकेट को प्राथमिकता दी क्योंकि मैं अपने करियर के पीक पर था। मैं एकमात्र खिलाड़ी हूं जो अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ स्तर पर होने के बावजूद प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं किसी चीज से जूझ रहा था।

युवराज ने कहा, मुझे उस समय तक नहीं पता था कि मुझे कैंसर हो गया है। मैं भाग्यशाली था कि मैं क्रिकेट को प्राथमिकता दे पा रहा था। भारत में विश्व कप होना था और मुझे हर चीज को साइड में रखकर क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करना था। हालांकि, मैं शरीर से संघर्ष कर रहा था। जब हमने विश्व कप जीता और ये सब शुरू हुआ तो मुझे कैंसर का इलाज कराना था। मुझे साल के अंत में इलाज के लिए जाना था, हालांकि, मुझे पहले ही जाना चाहिए था क्योंकि डॉक्टर ने मुझसे कहा था कि मेरे पास तीन से छह महीने का समय ही शेष है। या तो आप क्रिकेट खेलें और मैदान पर ही अपना जान गंवा दें या फिर अपना इलाज कराएं।

दोबारा मैदान पर उतरने के लिए प्रतिबद्ध थे युवी :  पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने कहा, सौरव गांगुली संन्यास ले चुके थे और मेरे लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना काफी जरूरी थी। मेरे पास अवसर था कि मैं नियमित रूप से टेस्ट क्रिकेट खेलूं। फिर मैं अपना इलाज कराने के लिए चला गया। यह एक कठिन सफर था जिसे मैं शब्दों में भी बयां नहीं कर सकता। लेकिन मैं दोबारा भारत के लिए खेलने को लेकर प्रेरित था क्योंकि सभी लोग कह रहे थे कि मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा।

‘मुझे सम्मान नहीं मिल रहा था’ :  युवराज ने साथ ही कहा कि उन्हें लग रहा था कि उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा जिस कारण उन्होंने जून 2019 में क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला लिया। युवराज ने 2017 से किसी भी प्रारूप में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं किया था और उन्होंने 2019 में अपने करियर को लेकर फैसला लिया। युवराज ने स्वीकार किया कि क्रिकेट से उन्हें जो आनंद मिलता था, वह धीरे-धीरे खत्म हो गया था। युवी ने कहा, मुझे अपने खेल में मजा नहीं आ रहा था। मुझे लग रहा था कि जब मुझे क्रिकेट खेलने में मजा ही नहीं आ रहा तो मैं क्यों खेल रहा हूं? मुझे समर्थन नहीं मिल रहा था। मुझे सम्मान नहीं मिल रहा था और मुझे लगा कि जब मेरे पास यह नहीं है तो मुझे यह क्यों करना चाहिए? मैं उस चीज से क्यों जुड़ा हुआ हूं जिसमें मुझे मजा नहीं आ रहा? मुझे खेलने की क्या जरूरत है? क्या साबित करने के लिए? मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता, न मानसिक रूप से और न ही शारीरिक रूप से, और इससे मुझे तकलीफ हो रही थी। जिस दिन मैंने खेलना बंद किया मैं फिर से पहले जैसा हो गया।

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