प्रत्येक वर्ष आश्विन के महीने में नवरात्रि के नौ दिनों को धार्मिक रूप से बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिन का इस्तेमाल आप अपने बॉडी- माइंड को डिटॉक्स करने के लिए भी कर सकते हैं। आयुर्वेद की मानें तो व्रत से आपके स्वास्थ्य को कई फायदे मिल सकते हैं। जैसे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर उसकी शुद्धि करने की। इस दौरान आपकी बॉडी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और मन भी शांत रहता है। आपके शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
फास्टिंग के आयुर्वेदिक बेनिफिट्स:
- पाचन तंत्र को आराम: अगर आपका पाचन तंत्र सही रहता है तो आप कई रोगों से बच जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अगर आप प्रतिदिन ऐसा भोजन करते हैं जिसमे बहुत ज्यादा तेल मसाला होता है तो आपकी अग्नि कमजोर हो जाती है। फास्टिंग के समय आप हल्के खाद्य पदार्थों जैसे फल, दूध, कुट्टू का आटा, साबुदाना, आदि का सेवन करते हैं। लगातार ऐसे पौष्टिक आहार का सेवन करने से शरीर के सभी विषाक्त पदार्थ बाहर आ जाते हैं और आपका बॉडी-माइंड दोनों शुद्ध हो जाता है।
- इन्द्रियों पर नियंत्रण: आयुर्वेद के अनुसार जब किसी व्यक्ति का मन शांत और एकाग्र होता है तब उसके सोचने की क्षमता बढ़ जाती है और वह किसी भी रोग से जल्दी रिकवर कर जाता है। नवरात्रि व्रत के दौरान न सिर्फ आहार में बदलाव होता है बल्कि पूजा पाठ और साधना से आत्मिक शुद्धि भी होती है जिससे आप अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित कर पाते हैं।
- शरीर रहता है हाइड्रेटेड : व्रत के दौरान आप जिन फलों को ग्रहण करते हैं उसमे पानी की मात्रा अच्छी खासी होती है इसलिए आपका शरीर हाइड्रेटेड रहता है और कोशिकाएं पुनः जीवित हो जाती हैं। इससे शरीर के सभी विषाक्त पदार्थ बाहर आ जाते हैं और स्किन निखर जाता है।
- माइंड फुलनेस: नवरात्रि में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोग मांस मदिरा, प्याज, लहसुन आदि जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करते हैं बल्कि इस दौरान केवल सात्विक आहार का ही सेवन करते हैं जिससे आपके अंदर साकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माइंड-बॉडी डिटॉक्स होता है।
- वजन नियंत्रण: आयुर्वेद में दोषों को बैलेंस करके ही किसी भी रोग का इलाज किया जाता है। फास्टिंग के दौरान आपका मेटाबॉलिस्म फ़ास्ट हो जाता है और पाचन शक्ति भी अच्छी हो जाती है जिससे वजन नियंत्रित रखना आसान हो जाता है और आप मोटापे के कारण होने वाले कई रोगों से बच जाते हैं।







