मंडला। कान्हा नेशनल पार्क के किसली क्षेत्र में एक साल पहले हुई तेंदुए की मौत का मामला आखिरकार सामने आ गया है। वन विभाग ने इस प्रकरण का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से तेंदुए के नाखून बरामद हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति वन्यप्राणी के अंग बेचने की फिराक में है। इस सूचना पर विभागीय टीम ने मलाजखंड के कंचन नगर क्षेत्र में घेराबंदी की। तलाशी के दौरान पटपरा निवासी धीरसिंह उइके के पास से तेंदुए के तीन नाखून बरामद हुए। जब अधिकारियों ने उससे सख्ती से पूछताछ की, तो उसने बताया कि ये नाखून उसे खटिया निवासी चेतराम पंद्रे से मिले हैं।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने चेतराम को हिरासत में लिया। पूछताछ में चेतराम ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि करीब एक साल पहले किसली क्षेत्र में चीतल के शिकार के लिए उसने करंट का जाल बिछाया था। इसी जाल में एक तेंदुआ फंस गया और उसकी मौत हो गई। घटना छिपाने के लिए आरोपियों ने तेंदुए के शव को किसली क्षेत्र के चुप्पे मैदान में दफना दिया था।
वन विभाग की टीम ने चेतराम की निशानदेही पर मौके पर पहुंचकर खुदाई करवाई। वहां से तेंदुए की हड्डियां और अन्य अवशेष बरामद किए गए। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थिति में अवशेषों का परीक्षण किया गया। इसमें डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. आशीष वैध, एनटीसीए की शिवांगी वेन्द्रे, वन्यप्राणी विशेषज्ञ चंद्रेश खरे, बफर जोन की डिप्टी डायरेक्टर अमिता केबी और फील्ड डायरेक्टर रविन्द्र मणि त्रिपाठी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने परीक्षण के बाद पुष्टि की कि बरामद अवशेष तेंदुए के ही हैं। यह खुलासा होने के बाद वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।







