धमतरी। छत्तीसगढ़ के पक्षी रिकॉर्ड में खूबसूरत ग्रेटर फ्लेमिंगो का नाम पहली बार जुड़ गया है, जिससे राज्य में पक्षी प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर 502 पहुंच गई है। आमतौर पर गुजरात के कच्छ और ओडिशा की चिल्का झील में दिखाई देने वाला यह दुर्लभ पक्षी धमतरी और कांकेर जिले में फैले गंगरेल जलाशय में देखा गया है। पक्षी विज्ञानी एएमके भरोस, गोपी किशन साहू, अमर मुलवानी और योगिता साहू के दल ने जलाशय के विभिन्न तटों पर इसकी मौजूदगी दर्ज की है।
प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा पर खतरा : गंगरेल क्षेत्र में अवैध शिकार के बढ़ते दबाव के कारण इन प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। शिकारियों के डर से यह गुलाबी परिंदे बड़े झुंडों में रहने के बजाय छोटे-छोटे समूहों में बिखर रहे हैं। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पक्षियों ने मुख्य किनारों को छोड़कर झील के बीच स्थित एक टापू पर शरण ली है, जो तट से लगभग दो किलोमीटर दूर है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष अप्रैल माह में हजारों की संख्या में यह गुलाबी पक्षी गंगरेल जलाशय में तीन से चार दिन का पड़ाव डालते हैं। इसके अलावा फुटाहामुड़ा क्षेत्र में गर्मियों के दौरान स्मॉल प्रैटिनकोल और लिटिल रिंग्ड प्लोवर जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी अपने घोंसले बनाती हैं।
पर्यटन केंद्र की संभावनाएं : पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों ने इस क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग उठाई है। जानकारों का मानना है कि यदि स्थानीय प्रशासन अवैध शिकार पर सख्त रोक लगाए और हरफर-पटौद तथा फुटाहामुड़ा को ‘संरक्षित वेटलैंड’ घोषित करे, तो यह क्षेत्र एक अंतरराष्ट्रीय बर्ड-टूरिज्म और बर्ड-वॉचिंग केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। गंगरेल जलाशय में पक्षी दर्शन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है।







